Category Archives: कथा-पिहानी

>नीक लोक

> नीक लोक ओ जे रहैत अछि इमानदार बेइमानी जखन धरि रहैत अछि नुकाएल नीक लोक ओ जे रहैत अछि सत्यवादी पकड़ल नहि जाइत छैक जखन धरि झूठ नीक लोक ओ जे रहैत अछि संस्कारी जखन धरि आगू नहि आबैत … Continue reading

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नीक लोक

नीक लोक ओ जे रहैत अछि इमानदार बेइमानी जखन धरि रहैत अछि नुकाएल नीक लोक ओ जे रहैत अछि सत्यवादी पकड़ल नहि जाइत छैक जखन धरि झूठ नीक लोक ओ जे रहैत अछि संस्कारी जखन धरि आगू नहि आबैत छै … Continue reading

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>एक धूर जमीन

> एक धूर जमीनक लेल जे अहाँ चिचिया रहल छी की सोचैत छी अहाँ संगे लऽ जाएब एक धूर जमीन सँ किछु नहि होएत साल आकि हजार सालसँ जमीन ओही ठाम छैक आइ छी अहाँ काल्हि नहि रहब जे अहाँक … Continue reading

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एक धूर जमीन

एक धूर जमीनक लेल जे अहाँ चिचिया रहल छी की सोचैत छी अहाँ संगे लऽ जाएब एक धूर जमीन सँ किछु नहि होएत साल आकि हजार सालसँ जमीन ओही ठाम छैक आइ छी अहाँ काल्हि नहि रहब जे अहाँक जमीन … Continue reading

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>मिठगर रौद

> ठिठुरैत ठंढ़ाकें झटकारि कs प्रकृति पहिरलक वसन्तक आवरण खर पतवारके बहारि कs जाड़क मानू होलिकाक संग भेल दहन रंग बिरंगक फूलक छींटसं फगुआ खेलाओत पूरा वातावरण एहेनमे हर्षित भs सबहक प्रशंसा अछि सूर्यकें अर्पण जकर ऊष्मा पाबि कs आएल … Continue reading

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मिठगर रौद

ठिठुरैत ठंढ़ाकें झटकारि कs प्रकृति पहिरलक वसन्तक आवरण खर पतवारके बहारि कs जाड़क मानू होलिकाक संग भेल दहन रंग बिरंगक फूलक छींटसं फगुआ खेलाओत पूरा वातावरण एहेनमे हर्षित भs सबहक प्रशंसा अछि सूर्यकें अर्पण जकर ऊष्मा पाबि कs आएल अछि … Continue reading

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>नोकरी आकि आजीवन कारावास

> नेनामे अहां घोंइट-घोंइट कs यादि करैत रहिऐ किताबक पन्ना सोचैत रहिऐ खूब पढ़ि-लिखि कs नीक सन नोकरी भेटत तहि लेल गिन-राति घसैत रही कलम क्लासमे अबैत रहि प्रथम मुदा जखन नहि भेटल सरकारी नोकरी तं प्राइवेट नोकरी करै पड़ल … Continue reading

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नोकरी आकि आजीवन कारावास

नेनामे अहां घोंइट-घोंइट कs यादि करैत रहिऐ किताबक पन्ना सोचैत रहिऐ खूब पढ़ि-लिखि कs नीक सन नोकरी भेटत तहि लेल गिन-राति घसैत रही कलम क्लासमे अबैत रहि प्रथम मुदा जखन नहि भेटल सरकारी नोकरी तं प्राइवेट नोकरी करै पड़ल एहि … Continue reading

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गब्बर केर इंसाफ…

देश मे चारु कात हाहाकार मचल रहैत अछि. लोक महंगाई… हिंसा… लूटपाट… रिश्वत… अफसरशाही… मिलावटखोरी… अराजकता… अव्यवस्था… घोटाला आओर भ्रष्टाचार सं परेशान रहैत अछि. त्राहि-त्राहि करैत रहैत अछि. एहि संकट… दुख के कोनो हल नहि दिखय छनि. अंधेरगर्दी सं निकलय … Continue reading

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>गब्बर केर इंसाफ…

> देश मे चारु कात हाहाकार मचल रहैत अछि. लोक महंगाई… हिंसा… लूटपाट… रिश्वत… अफसरशाही… मिलावटखोरी… अराजकता… अव्यवस्था… घोटाला आओर भ्रष्टाचार सं परेशान रहैत अछि. त्राहि-त्राहि करैत रहैत अछि. एहि संकट… दुख के कोनो हल नहि दिखय छनि. अंधेरगर्दी सं … Continue reading

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