>मैथिली के गर्त मे लs जाए लेल साहित्यकार जिम्मेदार?

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मैथिली भाषा के आई देश-दुनिया मे कि हाल भ गेल अछि ई कहय के गप नहि अछि. देश-दुनिया तं छोड़ु मिथिला मे सेहो मैथिलीक हाल नीक नहि अछि. बुढ़ बीमार लोक जकां केहुना क दम लs रहल अछि. रोजी-रोटी के कारण लोक मैथिली सं विमुख भ रहल छथिन्ह. हमरा जैसन जे लोक बोलय जानय छथिन्ह लिखय नहि जानय छथिन्ह. हम त किछ कोशिश करि लैत छी. सैकड़ों-हजारों एहन लोक छथिन्ह जे लिखय के कोशिशों नहि करय छथिन्ह.
मुदा आई अहां बिहार के स्कूल-स्कूल…कॉलेज-कॉलेज घुमि आउ. विद्यार्थी सभ मैथिली

नहि त बोलय छथिन्ह… नहि लिखय छथिन्ह. क्लास 9 आओर दस मे मैथिलीक पढाई होएत अछि. मुदा विद्यार्थी सभ मैथिली मे इंटरेस्ट नहि देखा रहल छथिन्ह. बच्चा सं… नेना भुटका सं मैथिली नहि पढ़य-लिखय के कारण हुनका सभ के मैथिली मे दिक्कत होए छनि. आओर परीक्षा मे नंबर के मामला होएत अछि. नीक सं नहि लिखब त नीक नंबर नहि मिलत. नीक ग्रेड नहि मिलत.

एहन मे विद्यार्थी सभ मैथिली विषय लेबय सं सेहो हिचकय छथिन्ह. कोर्स के किताबों मे कहानी तक त ठीक रहय छनि. मुदा जखन दोसर चीज के बात आबय छनि त विद्यार्थी सभ फंसि जाए छथिन्ह. समझय मे दिक्कत होए छनि. एहन मे ओ सोचय छथिन्ह किएक रिस्क लेल जाए. जे पहिने सं पढ़ने छी सेहे किएक नहि पढ़ल जाए. ओना लोक कहय छथिन्ह जे मैथिली मे नीक नंबर मिलय अछि. मुदा बिना लिखने नंबर केना मिलत.
ई तं भेल विद्यार्थी के गप. शहर के बात छोड़ू आब गाम-गाम…टोला-टोला मे पब्लिक स्कूल खुलि गेल अछि. सभ ठाम अंग्रेजी मे पढ़ाई भ रहल अछि. अंग्रेजी बाजनाय मस्ट भ गेल अछि. गाम सभ मे हिन्दी बाजय के छूट देल जा रहल अछि. एहन मे बच्चा मे मां-बाबूजी सभ सेहो हिन्दी…अंग्रेजीए बाजय के कोशिश करय छथिन्ह. बच्चा के करियर देखब कि मैथिली!
मैथिली बाजिओ के कि करताह? नहि कोनो बोर्ड-बैनर… नहि कोनो सिनेमा… नहि कोनो पेपर-अखबार आबैत अछि जेहि मे मैथिलीक काज पड़त. ओ मैथिली बाजि क अपन लहजा खराब नहि करय चाहय छथिन्ह. पेपर-मैगजीन … टीवी चैनल… किताब के दर्शन मुश्किल भ गेल अछि मिथिला मे. मैथिलीक काज आब विद्यापति समारोह टा रहि गेल अछि.
अहां बंगाल जाउ… सभ किछ बंगाली मे मिलत. साउथ मे जाउ सभ किछ तमिल…तेलगु… मलयालम मे मिलत… महाराष्ट्र मे जाउ सभ मराठी मे मिलत… पंजाब जाउ सभ किछ पंजाबी मे मिलत. नेपाल जाउ सभ किछ नेपाली मे मिलत. सभ किछ… स्टेशनक नाम… रेलगाड़ीक जानकारी… सरकारी कामकाज… पेपर-मैगजीन… टीवी चैनल… किताब सभ किछ ओतय के भाषा मे.
मुदा मिथिला मे आउ कतहुं सं पता नहि चलत जे मिथिला मे छी. किछ मैथिली मे नहि. दू-चारि-दस लोक टूटल -फूटल मैथिली बाजय वाला जरूर मिल जएताह. ई लोक नीति निर्धारक श्रेणी मे नहि आबय छथिन्ह. मुदा जे नीति-निर्धारक श्रेणी मे आबय छथिन्ह बस वोट लेबय के टाइम थापड़ि बजबाबय लेल मैथिली मे भाषणबाजी करय छथिन्ह. ई मैथिली प्रेम नहि मैथिली के शोषण अछि.
जखन पूरा मिथिला मे एकोsटा ढंग के मैथिली अखबार नहि अछि…पत्रिका नहि अछि…टीवी नहि अछि… दस दोकान खोजला पर एक मे दू-चारि टा मैथिली किताब मिलैत अछि. कोनो पोस्टर… दिशा-निर्देशक… निर्देश… कामकाज मैथिली मे नहि अछि … तखन बेकारे नई मैथिली आओर मिथिला राज्य लेल कूदय फानय छी. एहन मे सिर्फ मिथिला राज्य के नाम पर राजनीति करय वाला अहां पर इमोशनल अत्याचार करि रहल छैथि.
मिथिला राज्य के मांग करय वाला के मिथिला के विकास सं कोनो लेना-देना नहि छनि. बस ओ लोक के मिथिला-मैथिली के नाम पर बरगलाबय छथिन्ह. हुनकर शोषण करय छथिन्ह. हुनका बीच अपन राजनीति चमकाबय छथिन्ह. अपन भाई-भतीजा के बढावा दैय छथिन्ह. पार्टी के नेता सभ के ई बताबय के कोशिश करय छथिन्ह जे देखु हमर मैथिल लोक पर कतेक पकड़ अछि. देखु हमरा पास कतेक वोट अछि.
मैथिली के गर्त मे ल जाए के लेल मैथिली साहित्यकार सभ सेहो कम जिम्मेदार नहि छथिन्ह. हुनका सभ के कोशिश केहुना अपन किताब छपय… लाइब्रेरी के लेल ओकर खरीदारी होए. आओर केहुना कोनो अवार्ड के लेल सेलेक्शन होए. अकादमी आओर दस तरहक अवार्ड पा अपने मे फुलैत रहय छैथि. मुदा हिनका सभ के ई चिंता नहि रहय छनि जे मैथिली… मिथिला कोना आगां बढ़त? बस भाषणबाजी.
अगर मिथिलाक साहित्यकार… कवि… उपन्यासकार… मैथिल विद्वान मैथिलीक विकास के लेल दिन-राति एक करने रहतिएन्हि त मैथिलीक ई हाल नहि रहैत. मुदा हुनका एहि सभ सं कोनो फर्क नहि पड़य छनि. पुरस्कार मिल गेल…जय गंगा. ई कहिओ सुनलौं जे फनां साहित्यकार मैथिली के पढ़ाई नहि होए के कारण… मैथिलीक के लोक सेवा आयोग सं हटाबय के कारण अवार्ड लेय सं इनकार कएने होएतिन्ह?
नहि कोनो ढंग केर पत्रिका निकालय छथिन्ह आ नहि कोनो अखबार. बस सरकारी आयोग मे शामिल होए के … कुर्सी पाबय के जोगाड़ मे रहय छथिन्ह. मैथिली के किताब लिखबो करय छथिन्ह तं के पढ़य छनि हिनका? कोन आधार पर पुरस्कार मिल जाए छनि हिनका सभ के? जखन मिथिला मे मैथिलीक किताब सभ मिलते नहि अछि…लोक पढ़िते नहि अछि तखन दू-चारि लोक के पढ़ला-लिखला… चुनला पर अवार्ड पाबि जाए छैथि.
हिनका सभ के मैथिली के विकास के लेल… बढ़ावा के लेल आगां आबय पड़तन्हि… नहि त किछ दिन के बाद लोक एहि पर एतराज उठाबय के शुरू करि देथिन्ह जे हिनका कोन आधार पर अवार्ड देल जा रहल छनि? कतेक लोक पढ़लक. मैथिलीक पाठक के संख्या कतेक अछि. किताबक कतेक प्रति बिकल… कतेक लाइब्रेरी मे गेल कतेक दोकान सं बिकाल?
एहन नहि होए जे किछ साहित्यकार सभ अपने मे मिल साहित्यकार के सलेक्शन करताह आओर अपने गिनल -चुनल लोक मे अवार्ड बांटताह. अंधा बांटय रेवड़ी वाला होल एहि मे नहि होबाक चाही. एकर ध्यान राखय के जरूरत अछि. अगर ऐना भेल त किछ दिन बाद इहो सुनय लेल मिल सकैत अछि जे मैथिली मे आब कोनो अवार्ड नहि देल जाएत.
अखन जनगणना चलि रहल अछि. किछ दिन के बाद बता चलि जाएत जे मैथिली मातृभाषा लिखाबय वाला के संख्या बढ़ल आ कमल अछि. बढ़ल त नीक घटल त मिथिला…मैथिली के लsक राजनीति चलाबय वाला के एकटा जोर के झटका लगतन्हि. अहां सभ के कि लगैत अछि कि मैथिलीक विकास के लेल साहित्यकार सही योगदान क रहल छथिन्ह?
कि मिथिला राज्य के मांग करय वाला सही अछि? कि हिनका सभ के अपन राजनीति के छोड़ि मैथिली-मिथिलाक कनिओ चिंता छनि? अगर छनि त अखन धरि पूरा मिथिला मे मैथिली मे लिखल कोनो चीज के दर्शन किएक नहि होएत अछि? अहां एकर जवाब दय के आओर राजनीति करय वाला सं पूछय के कोशिश करब. धन्यवाद.

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