नीक लोक

नीक लोक ओ
जे रहैत अछि इमानदार
बेइमानी जखन धरि
रहैत अछि नुकाएल
नीक लोक ओ

जे रहैत अछि सत्यवादी
पकड़ल नहि जाइत छैक
जखन धरि झूठ
नीक लोक ओ
जे रहैत अछि संस्कारी
जखन धरि आगू नहि
आबैत छै राक्षसी प्रवृति
नीक लोक ओ
जे रहैत अछि विश्वासी
जखन धरि मुँह नहि खोलैत अछि
धोखा पाओल लोक
नीक लोक ओ
जे नहि करत अश्लील गप
जखन धरि आगू नहि
आबैत अछि कामुक प्रस्ताव
नीक लोक ओ
जे करत लोक संग मीठ गप
जखन धिर आगू नहि
आबैत छैक प्रताड़ित पत्नी
विनीत उत्पल
( हम पुछैत छी )

Share/Save/Bookmark
हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com
This entry was posted in कथा, कथा-पिहानी, कविता, मैथिली, विनीत उत्पल, Maithili. Bookmark the permalink.

1 Response to नीक लोक

  1. नीक लोक ओ
    जे रहैत अछि विश्वासी
    जखन धरि मुँह नहि खोलैत अछि
    धोखा पाओल लोक
    khoob neek likhne chiyaee.

Comments are closed.