>आब मैथिली मे गीता…

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रामायण के बाद आब गीता सेहो मैथिली मे आबि गेल अछि. मैथिली मे ई नवका गीता लिखलखिन्ह मधुबनी जिला के रुद्रकांत पाठक जी. रुद्रकांत जी रहिका ब्लॉक के सतलखा पाठकटोल सं छथिन्ह. पाठक टी रिटायर टीचर छथिन्ह. हिनकर गीता केर नाम छनि ‘रद्रांशकृत वचनामृत गीता’

रुद्रकांत जी गीता के श्लोक के पहिने मैथिली मे पद्य के रूप मे अनुवाद कएलखिन्ह फेर ओकर भाव के अनुवाद करि ओकरा आम लोक के लेल आसान बना देलखिन्ह. सभ सं अचरज के गप ई जे ओ एहि गीता के अनुवाद सिर्फ डेढ़ मास मे कएलखिन्ह. जखन कि गीता के 18 अध्याय मे कुल 705 श्लोक अछि.

हिनकर अनुवाद कएल गीता आम लोक के आसानी सं समझ मे आबि सकैत अछि. मैथिली के लेल ई एकटा नीक खबर अछि. एहि सं मैथिली साहित्य आओर समृद्ध होएत आओर लोक के रुझान सेहो बढ़त. हुनका सं प्रेरणा ल आओर लोक एहि क्षेत्र मे काज करय लेल आगां अएताह आओर नव-नव किताबक… ग्रंथक अनुवाद करताह.

मुदा सभसं पैघ जरूरत अछि मैथिली साहित्य के आम लोक तक पहुंचाबय के. अखन धरि ई आम लोक के पहुंत सं दूर अछि. दिल्ली…पटना केर त गप छोडुं दरभंगा…मधुबनी तक मे मैथिलीक पोथी…किताब खरीदय लेल लोक के भारी परेशानी उठाबय पड़य छनि. दस दोकान खोजु त एक मे दू-चारि टा किताब मिलत.

मिथिला अलग राज्य के मांग के लेल संघर्ष मे जुटल लोक सभ के पहिने एहि बात पर ध्यान देबय के चाही. नहि किताब… नहि कोनो नियमित पेपर… पत्रिका आ चैनल. पूरा मिथिला घुमि लिअ मुश्किल सं एकटा दोकान के बोर्ड मैथिली मे मिलत. अखन काफी किछ करय के जरूरत अछि. कि कहैत छी अहां?

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हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com
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7 Responses to >आब मैथिली मे गीता…

  1. nandjee says:

    >solah aana sach hitendra ji….Pujya Pathak ji san agrah kayal jay je okra face book wa net par samanya ke lel kichu ans prastut karaith.pher okar prashar apne aap hoyat……

  2. >Bahut khushik bat je pathak ji geetak anuwad kalaith. Sanghi ham kahay chahait chhi je ahi se pahine "MAITHILIPUTRA PRADEEP JEE" 3 pahine akar anuwad kane chhaith jakar ekta prati hamra lag majud achhiDhanyabadDayakant

  3. auimpk says:

    >rudrakant pathak ji ke koti koti naman. atek baraka gaurab ee mithila ker gaurav ke vishay bhel. hum asha karai chhi je rudrakant pathak ke sab sa pahine maithili academy, patna ke taraf s sammanit kaiyal jau. aur aai pushtak ke vimochan me sahyog del jaau.

  4. >Dayakant jee… ehi nav jaankaari ke lel ahank bahut bahut dhanyawad.. ehina aaga seho apan vichaar dait rahab

  5. >Hitendra Jee namaskarAha kahi te pothik (Mukhya Page) ham scanning kay ke bhej devDhanyabad

  6. >Dayakant jee neki aur poochh-poochh… agar bhe sakai t bhejbaak kasht karu… ahank bahut bahut shukriya

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